Moral stories in Hindi short-नैतिकता की कहानियां

Moral stories in Hindi short: दोस्तों कहानियाँ समय व्यतीत करने का एक शानदार तरीका है और साथ ही साथ बच्चों में नैतिकता को विकसित करने का एक मौका भी है।दोस्तों सभी ने बचपन में बहुत सी कहानियाँ जैसे moral storie पढ़ी होंगी। आज के इस व्लॉग में 15 Moral stories in Hindi short है जो आपको बहुत पसंद आने वाली है। 

Moral stories in Hindi short

दोस्तों Moral stories वह कहानियाँ होती है जो आपको जीवन के कुछ महत्वपूर्ण सबक को सीखने में मदद करती है बच्चों को कहानियाँ बहुत पसंद होती है। स्कूल में भी बच्चों को कहानियों के बारे में बताया जाता है जैसे moral stories in hindi for class 5, moral stories in hindi for class 10. आदि ।  

सोने के अंडे देने वाली मुर्गी

Moral stories in Hindi short
Moral stories

एक समय की बात है एक गांव मैं एक किसान रहता था। वह बहुत गरीब था पेट भरने के लिए वह मजदूरी करता था। किसान की आमदनी कम होने के कारण वह बहुत मुश्किल से अपने दिन गुजार रहा था। एक दिन उसे एक बाबा मिलें, बाबा ने किसान को एक मुर्गी उपहार के रूप में भेंट दी। मुर्गी रोज सोने का अंडा देती थी। किसान मुर्गी को घर लेकर आ गया । सुबह होते ही किसान ने देखा की मुर्गी ने एक अंडा दिया है जो सोने का है किसान बहुत खुश हुआ। किसान ने अंडे को बाजार में बेच दिया। 

किसान हर रोज सोने के अंडे को ले जाकर बाजार में बेच देता था। कुछ समय गुजरने के बाद वह किसान बहुत अमीर आदमी बन गया। सारे गांव के लोग किसान का मान सम्मान और आदर देने लगे, परन्तु ज्यादा पैसे होने की वजह से वह लालची बन गया था ।

एक दिन उसने सोचा कि मुर्गी के अन्दर बहुत सारे सोने के अंडे होगें अगर वह सारे अंडे एक साथ मिल जाएंगे तो वह उस गांव का सबसे अमीर आदमी बन जायेगा। उसने परिणाम की परवाह किये बिना एक चाकू लिया और मुर्गी के पेट को काट दिया परन्तु, उसे मुर्गी के पेट के अंदर एक भी अन्डा नहीं मिला। किसान को धीरे-धीरे बात समझ मैं आ रही थी की उसने लालच में अपनी सोने की अन्डे देने वाली मुर्गी को मार कर बहुत बड़ी गलती कर दी है। लेकिन बाद में पछतावे के सिवा उसे कुछ नहीं मिला। 

कौवा और लोमड़ी की कहानी

बहुत समय पुरानी बात है। एक कौआ भोजन की तलाश में इधर उधर घूम रहा था बहुत घूमने पर भी उसे कहीं भोजन नहीं मिला । वह थक हार कर एक पेड़ पर जा बैठा तभी उसकी नज़र एक प्लेट पर रखे पनीर के टुकड़े पर पड़ी । कौआ खुश होकर बोला वाह किस्मत हो तो ऐसी तभी उसने उस पनीर के टुकड़े को अपनी चोंच से पकड़ लिया और उड़ गया । उसके पीछे पीछे ओर भी कौंवे उड़ रहे थे। वे उससे उस पनीर के टुकड़े को छिनना चाहते थे पर वह जैसे-तैसे सबको चकमा देकर वहां से भागने में कामयाब हो गया। 

कौआ बहुत दूर जाकर वह एक पेड़ पर बैठ गया। तभी वहां से एक लोमड़ी गुजर रही थी । लोमड़ी ने कौंवे की चोंच पर फंसा पनीर का टुकड़ा देखा तो उसके मुंह में पानी आ गया। वह कौंवे से उसके पनीर को अपने कब्जे में करने की योजना बनाने लगी। लोमड़ी कौंवे से बोली अरे कौंवे भाई तुम कितने खूबसूरत हो तुम्हारी आवाज़ कितनी प्यारी और मधुर है और तुम्हारे पंख की तो बात ही अलग है । 

कौंवे भाई क्या आप मुझे एक गाना सुनाओगे । कौआ चुप रहकर सोचने लगा कि आज तक तो किसी ने भी ऐसा नहीं बोला कौआ सोच रहा था लेकिन उसने अपना मुंह नहीं खोला। लोमड़ी फिर से बोलने लगी एक गाना सुना दो भाई क्या आप अपनी बहन को गाना नहीं सुना सकते। आप कितने खूबसूरत हो आपके पंख भी बहुत खूबसूरत है । लोमड़ी के बार बार तारीफ करने से कौवा बोल पड़ा और उसके चोंच से पनीर का टुकड़ा गिर गया। लोमड़ी पनीर को चट करके वहां से निकल गई। कौवा बेचारा बेवकूफ बन गया।

ईमानदार लकड़हारा

बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गांव में एक गरीब लकड़हारा अपने परिवार के साथ रहता था। वह‌ हर दिन जंगल में जाता था और लकड़ी काट कर बाजार में बेचता था। वह लकड़ी बेच कर ही अपना और अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। एक दिन वह लकड़हारा लकड़ी काट रहा था अचानक लकड़ी काटते समय उसके हाथ से कुल्हाड़ी नदी में गिर गई। नदी बहुत गहरी थी। लकड़हारे को तैरना भी नहीं आता था। वह लकड़हारा नदी के किनारे बैठ कर रोने लगा तभी नदी में से एक देवी मां प्रकट हुई।

देवी मां ने लकड़हारे से रोने का कारण पूछा तब लकड़हारे ने बताया कि उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई है और उसे तैरना भी नहीं आता है। देवी मां ने मुस्कुराते हुए नदी में डुबकी लगाई और एक सोने की कुल्हाड़ी बाहर निकाली और लकड़हारे से कहा ये लो तुम्हारी कुल्हाड़ी। लकड़हारे ने कहा मां ये वाली कुल्हाड़ी मेरी नहीं है यह किसी और की होगी । देवी मां ने फिर से डुबकी लगाई और फिर चांदी की कुल्हाड़ी निकाली और फिर से पूछा क्या ये है तुम्हारी कुल्हाड़ी। लकड़हारे ने फिर से मना किया नहीं ये नहीं है ।

देवी मां ने फिर से डुबकी लगाई और इस बार उन्होंने तीनों कुल्हाड़ी निकाली और लकड़हारे से पूछा कि अब बताओ इनमें से कौन सी कुल्हाड़ी युम्हारी है इस बार लकड़हारे ने कहा कि देवी मां मेरी यह लोहे की कुल्हाड़ी है। लकड़हारे की ईमानदारी को देखकर देवी मां प्रसन्न हो गयी और उन्होंने वह तीनों कुल्हाड़ी लकड़हारे को दे दी।

ईमानदार किसान की कहानी

एक गांव मैं एक गरीब किसान रहता था।  वह बहुत ही ईमानदार और मेहनती था ।वह अपने छोटे से खेत में काम करता था और बहुत ही खुश रहता था। उस किसान के ईमानदारी के चर्चे पूरे गांव में थे। उसका एक दोस्त था जो  गांव के राजा के यहां सिपाही का काम करता था। वह  किसान से मिलने हर रोज उसके घर जाता था। एक राजा ने दरबार में एक एलान किया कि उसे बगीचे में काम करने वाला एक अच्छा सा कारीगर चाहिए जो उसके बगीचे के पेड़ पौधे और फूलों काअच्छे से ध्यान रख सके।

राजा का यह एलान सुन कर किसान के मित्र सिपाही ने सोचा यही मौका है किसान से मित्रता निभाने की जिससे किसान का भला भी हो जायेगा। यह सोचकर सिपाही ने राजा से कहा महाराज में एक ऐसे इन्सान को जानता हु जो इस काम को बहुत अच्छे से करेगा। राजा ने सिपाही को आदेश दिया कि उसे कल से ही बगीचे में काम करने को कह देना । उसी समय वह सिपाही उस किसान के घर गया और किसान को काम के बारे में सारी बातें बता दी। किसान ने भी खुशी खुशी काम के लिए हां कर दिया।

अगले ही दिन वह किसान अपने दोस्त के साथ राज महल पहुंच गया। सिपाही  किसान को राजा सामने ले गया।और राजा ने किसान को बगीचे की देख भाल करने का कार्य सौप दिया और कहा कि अगर तुम ईमानदारी से कार्य करोगे तो मैं तुमको ५० सोने की मुद्राऐ हर महीने दूंगा। किसान ने खुशी खुशी हां कर दिया। वह उसी समय से बगीचे का कार्य करने में लग गया। किसान बहुत ही मन लगाकर काम करने लगा। कुछ ही दिनों में किसान ने बगीचे को बहुत ही सुन्दर और हरा भरा बना दिया। किसान के काम को देखकर राजा बहुत खुश हुआ।

Moral stories in hindi for class 5-ईमानदार किसान की कहानी

राजा को किसान का काम बहुत पसंद आया। एक दिन किसान बगीचे में खुदाई कर रहा था तभी उसे जमीन के नीचे कुछ महसूस हुआ। थोड़ी और खुदाई करने पर उसने देखा नीचे एक बहुत बड़ी संदुक थी । किसान ने संंदुक बाहर निकाला और उसे खोल कर देखा। संदूक सोने चांदी और हीरे से भरी हुई थी।  यह देख कर किसान बहुत खुश हुआ और अपनी ईमानदारी दिखाते हुए वह तुरंत राजा के पास गया।  किसान ने राजा को सारी बात बताई। किसान की ईमानदारी देखकर राजा बहुत खुश हुआ।

वह किसान के साथ वहां गया जहां उसे खजाना मिला था। राजा ने कहा यह खजाना तो हमारे पुरखों का है हम इसे कई वर्षों से खोज रहे थे। खजाना देखकर राजा बहुत खुश हो जाता है और अगले ही दिन वह किसान से कहता है बोलो तुम्हे क्या चाहिए। किसान कहता है मुझे कुछ नहीं चाहिए मालिक मेरे पास जो है में उसी में खुश हूं। किसान की बात सुनकर राजा और भी ज्यादा खुश हो गया। राजा ने किसान को अपना मंत्री बनाने का फैसला किया। किसान ने राजा की बात मान ली और राजा का मंत्री बन गया। 

चतुर खरगोश की कहानी

Moral stories in Hindi short

एक बार की बात है एक जंगल में एक शेर रहता था। वह जंगल में रहने वाले सभी जीव जन्तु को मार कर खा जाता था इसी कारण से सभी जीव जन्तु को शेर से बहुत डर लगता था । एक दिन सभी जानवरों ने शेर के साथ मिलकर एक समझौता किया कि शेर किसी को मारे नहीं बल्कि रोज एक जानवर मरने के लिए शेर के पास आ जायेगा।रोज एक जानवर अपनी बारी से शेर के पास पहुंच जाता था।  शेर उसे खा जाता था । अब बाकि जानवर बिना डरे जंगल में घुमते थे।  

एक दिन इसी तरह से एक खरगोश की बारी आयी। वह धीरे-धीरे शेर के पास जा ही रहा था कि तभी उसे अचानक रास्ते में एक तरकीब सूझी। वह बहुत देर से शेर की गुफा के पास पहुंचा। शेर बहुत भूखा था। भूखा होने के वजह से वह अपनी गुफा के बाहर चक्कर लगा रहा था। खरगोश को देखते ही शेर बहुत जोर से गरजा और बोला अरे मुर्ख खरगोश तुमने आने में इतनी देर क्यों कि में बहुत बहुत भूखा हु अब में तुझे खाकर अपनी भूक को शांत करूँगा। 

खरगोश बोला हे जंगल के राजा में आपको क्या बताऊं हम पांच भाई आपकी सेवा के लिए आ ही रहे थे कि रास्ते में एक दूसरा शेर मिला और वह बोला  कि वह जंगल का राजा है उसने हम पर हमला कर दिया और मेरे चारों भाइयों को खा गया।

moral stories in hindi for class 10-चतुर खरगोश की कहानी

महाराज मैं किसी तरह से अपनी जान बचाकर आपको यह संदेश देने पहुंच गया। यह बात सुनकर शेर बहुत ज्यादा गुस्सा हो गया और बोलने लगा कहा है वह दुष्ट जो अपने आपको राजा बता रहा है। मुझे दिखाओ में अभी उसका काम खत्म करता हूं। तभी खरगोश उसे एक कुंए के पास ले गया। शेर ने कुंए में झांककर देखा तो उसको अपनी ही परछाई दिखाई दी और उसे वह क्रोध में दूसरा  शेर समझकर ज़ोर से गरजा और कुंए के अन्दर छलांग लगा दी परन्तु उस कुएं में कोई शेर नहीं था। वहां तो सिर्फ पानी ही पानी था और बाहर निकलने का कोई रास्ता भी नहीं था।

शेर बहुत देर तक पानी में छटपटाता रहा और वही डुब के मर गया। इस तरह उस छोटे से खरगोश ने अपनी चतुराई से खुद की और जंगल में रहने वाले अन्य जानवरों की भी जान बचाई।

प्यासे कौवे की कहानी

Moral stories in Hindi short

एक समय की बात है गर्मी का मौसम था।  एक कौआ था जो बहुत प्यासा था । वह पानी की तलाश में इधर उधर घूम रहा था उसे दूर दूर तक कहीं पानी नहीं मिल रहा था। आखिर में वह निराश होकर एक पेड़ में बैठ गया। प्यास से उसका बहुत बुरा हाल हो रहा था तभी उसे एक बगीचे में एक घड़ा दिखाई दिया। कौआ घड़े के पास गया घड़े में उसको पानी दिखाई दिया ।

कौआ पानी पीने के लिए अपनी चोंच घड़े के अन्दर डालता है लेकिन उसकी चोंच पानी तक नहीं पहुंच पाती है क्युकि घड़े में पानी बहुत कम था। कौवा बहुत निराश हो जाता है तभी कौआ सोचता है और उसको एक तरकीब सूझती है । वह पास पड़े कंकड़ के टुकड़ों को उस घड़े में एक एक कर डालने लगता है । घड़े में कंकर के टुकड़ो पड़ने से पानी घड़े के ऊपर आ जाता है जिसके बाद कौवा पानी पीकर अपनी प्यास को शांत करता है। 

मेहनती नन्ही लाल मुर्गी

एक समय की बात है। एक नन्ही लाल मुर्गी थी । उसके तीन मित्र थे । बिल्ली , कुत्ता और बन्दर। वह अपने मित्रों के साथ रहती थी। नन्ही लाल मुर्गी बहुत ही मेहनती थी लेकिन उसके तीन मित्र बहुत ही आलसी थे। वह दिन भर सोते रहते थे। कुछ काम नहीं करते थे। एक दिन की बात है उस नन्ही लाल मुर्गी को एक मक्के का दाना मिला उस मेहनती मुर्गी ने अकेले ही उस दानें को बोया। जब वह दाना बड़ा हुआ तब उसमें मक्के लगें।

नन्ही लाल मुर्गी ने मक्के की फसल को काटा और फिर वो उसे पीसने के लिए चक्की वाले के पास ले गई। चक्की वाला उस नन्हे से लाल मुर्गी की मेहनत से बहुत खुश हुआ और उसने मक्के का आटा पीसा और उसको दे दिया। फिर वह घर आ गई । घर आकर नन्ही लाल मुर्गी ने अपने आलसी मित्रों को शिक्षा देने के लिए सिर्फ अपने लिए ही मक्के की रोटी और सूप बनाया। उसके आलसी दोस्त सब देखते रह गए ।

राजा और चिड़िया की कहानी

एक बार एक राजा जंगल मैं भ्रमण करने निकला भ्रमण करते समय उसे एक चिड़िया दिखाई दी । वह  चिड़िया बहुत ही सुन्दर और अनोखी थी। राजा ने उस चिड़िया को पकड़ लिया। वह उसको पकड़ कर राज महल ले जाने लगा तभी कुछ समय के बाद चिड़िया बोल उठी। चिड़िया को बोलते हुए देखकर राजा आश्चर्यचकित हो गया। राजा ने पहले कभी ऐसी चिड़िया नहीं देखी। चिड़िया बोली हे महाराज मुझे छोड़ दें । 

राजा ने चिड़िया से कहा में तुम्हें नहीं छोड़ूगा। मैं तुम्हें राजमहल ले जाऊंगा और  फिर वहां कैद करके रखूंगा। यह सब सुन चिड़िया  पहले तो डर गई फिर बोली कि राजा साहब अगर आप मुझे छोड़ दें तो मैं आपको चार ऐसी ज्ञान की बात बताउंगी जो आपके जीवन को बदल देगी और आपको जीवन में कभी हारने नहीं देगी।

राजा चिड़िया से बोला मुझे पहली बात बताओ तब चिड़िया बोली महाराज हाथ में आये  शत्रु को जाने मत दीजिए। राजा ने कहां अच्छा अब मुझे दूसरी बात बताओ । चिड़िया बोली महाराज आप कभी भी असंभव बात पर यकीन मत करना । फिर राजा बोला चलो अब तीसरी बताओ चिड़िया बोली बीती हुई बातों पर कभी पश्चाताप मत करना जो बीत गया सो बीत गया। राजा बोला चलो अब आखरी चौथी बात भी बता दो । इस बार चिड़िया बोली राजा साहाब आपने मुझे बहुत जोर से पकड़ा है मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही है। अगर थोड़ी ढील दे देते तो मैं आपको चौथी बात आसानी से बता सकती।

Moral stories in Hindi short- राजा और चिड़िया की कहानी

राजा चिड़िया के चौथी बात सुनने के लिए ने अपना हाथ थोड़ा ढीला छोड़ दिया। राजा की ढीली पकड़ होने से चिड़िया को मौका मिल गया तभी वह फर्र से उड़ गई। चिड़िया बोली राजा साहब मेरे पेट मैं दो हीरे है अगर आप मुझे पकड़ कर रखते तो वह हीरे आपको मिल जाते। राजा पश्चाताप करने लगा । वह पश्चाताप की आग में जलने लगा। राजा का यह हाल देख कर चिड़िया बोली राजा साहाब मैंने अभी अभी आपको तीन ज्ञान की बात बतायी थी। 

पहली हाथ मैं आये शत्रु को कभी जाने मत देना परन्तु आपने मुझे छोड़ दिया। दूसरी मैंने आपको बताया था किसी भी असंभव बातों पर यकीन मत करना लेकिन आपने यकीन किया। राजा साहाब आप खुद सोचिए कि इतनी छोटी सी चिड़िया के पेट में हीरे कैसे हो सकते हैं और फिर मैंने आपसे कहा कि बीते हुए बातों पर पश्चाताप मत करना जो हो गया सो हो गया उसे बदला नहीं जा सकता लेकिन आप उदास हो गये और पश्चाताप करने लगे। 

इस बार राजा बोला चलो अब मुझे चौथी ज्ञान की बात भी बता दो। क्या है तुम्हारी वह ज्ञान की बात। चिड़िया बोली क्या करोगे चौथी ज्ञान की बात सुनकर पहले ही आप तीन बातें भूल चुके हो फिर भी मैं चौथी ज्ञान की बात बता ही देती हूं। मेरी चौथी ज्ञान की बात यह कहती हैं कि नया सीखने का कोई मतलब नहीं अगर अब तक आपने जो सीखा उसे अपने जीवन में लागू नहीं किया तो कोई फायदा नहीं होगा। 

कौंवे का शिकार

एक पहाड़ को ऊंची चोटी में एक बाज रहता था। पहाड़ के आस पास खरगोश रहते थे। बाज उन खरगोशों को आसानी से पकड़ कर खा लेता था। पहाड़ के दूसरे भाग में एक बरगद का पेड़ था जिस पर एक कौआ अपना घोंसला बना कर रहता था। कौआ हर रोज बाज को खरगोश का शिकार करते हुए देखता था।। कौआ बहुत आलसी था। कौंवे की कोशिश हमेशा यही रहती थी कि बिना मेहनत किए खाने को मिल जाए।

जब भी खरगोश बाहर निकलते थे तो बाज एक ऊंची उड़ान भरता था और एक दो खरगोशों को उठाकर ले जाता था । कौआ बेचारा मजबूर होकर यह सब देखता रहता था। एक दिन कौए ने सोचा कि ये चालाक खरगोश वैसे तो मेरे हाथ आयेंगे नहीं अगर इनका मुलायम मांस खाना है तो मुझे भी बाज की तरह ऊँची छलांग लगानी होगी। कौआ सोचने लगा की वह ऐसा कर के एक खरगोश को तो पकड़ ही लेगा । दूसरे दिन कौंवे ने खरगोश को पकड़ने के लिए एक ऊंची उड़ान भरी उसने खरगोश को पकड़ने के लिए ठीक बाज की तरह जोर से झपट्टा मारा।

कौआ कभी भी बाज का मुकाबला नहीं कर सकता है । खरगोश ने कौंवे को देख लिया। और झट से वहां से भागकर अपने बिल में घुस गया। कौआ झपट्टा मारने के चक्कर में नीचे पत्थर से टकरा गया जिससे उसकी चोंच और गर्दन टूट गई और वह बुरी तरह से घायल हो गया।  कौंवे को ऐसा करने से एक अच्छा सा सबक मिल गया।

चिंटू और पिंटू की शरारत‌‌

एक जंगल में एक हाथी रहता था। हाथी के दो बच्चे थे। उन बच्चों का नाम चिंटू और पिंटू था। दोनों की उम्र लगभग 2 साल की थी। वे दोनों भाई खूब शरारत करते थे। चिंटू बहुत ज्यादा शरारत करता था। वह पिंटू के सूंड में अपने सूंड को लपेट कर खींचता रहता था और कभी-कभी उसे धक्का देकर गिरा देता था। एक दिन की बात है वह दोनों खेल रहे थे । खेल में दोनों लड़ते झगड़ते दौड़ रहे थे। अचानक से चिंटू का पैर फिसल गया और वह सीधे जाकर एक गड्ढे में गिर गया।

चिंटू गड्डे में से बाहर निकलने की बहुत कोशिश करता रहा लेकिन वह बाहर नहीं निकल पाया। गड्डे के ऊपर से पिंटू उसे अपनी सूंड़ से ऊपर खींचने की कोशिश करता है लेकिन उसकी कोशिश बार-बार असफल हो जाती थी । पिंटू अचानक दौड़ कर वहाँ से चले जाता है और अपनी मां को बुला कर लें आता है। मां चिंटू को अपनी लम्बी सूंड़ में लपेटकर बाहर निकाल देती है। चिंटू रोने लगता है उसको इस बार उसकी शरारत उसी पे भारी पड़ गई। उसने रोते हुए कहा कि आज के बाद वह कभी शरारत नहीं करेगा । फिर वह दोनों भाई बहुत प्यार से खेलने लगे। उन दोनों को खुश देख कर उनकी मां भी खुश हो गयी।

छोटे बड़े दोस्त

एक समय की बात है एक जंगल में एक शेर रहता था। वह दिन भर जानवरों का शिकार करता था और जब थक जाता तो किसी पेड़ के नीचे बैठकर आराम कर लेता था । एक दिन की बात है एक पेड़ के नीचे शेर‌ शिकार करके आराम कर रहा था तभी एक छोटी सी चुहिया बिल में से बाहर आयी और शेर के पीठ पर नाचने लगी। 

चुहिया के पीठ पर नाचने से शेर की नींद खुल गयी जिससे शेर को बहुत गुस्सा आया वह जोर से गरजा और बोला अरे ऐ चुहिया तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी पीठ पर चढ़ने की तू जानती नहीं मैं जंगल का राजा हूं तूने मेरी नींद खराब कर दी । रूक जा में तुझे सबक सिखाता हूं। ऐसा कह कर शेर ने चुहिया को अपने पंजों से दबोच लिया । चुहिया डर के मारे बहुत कांपने लगी। वह बोली महाराज आप जंगल में बड़े-बड़े जानवरों का शिकार करते हैं में तो छोटी सी चुहिया हु।  मुझे मारकर आपका क्या भला होगा। मैं छोटी हूं तो क्या पता मैं कभी ना कभी आपके काम आ सकती हूं।

शेर उसकी बात सुनकर बहुत जोर से हंसा और उसने चुहिया को छोड़ दिया। एक दिन की बात है शेर सचमुच में मुसीबत में पड़ गया वह जंगल में बिछाये एक जाल में फस गया। वह जाल एक शिकारी का था जो बहुत ही क्रूर था। वह जंगली जानवरों को पकड़ कर उसे शहर में बेच देता था। जाल में फसते ही शेर घबराकर मदद के लिए जोर जोर से दहाड़ने लगा। चुहिया ने शेर के दहाड़ने की आवाज सुनी और वह बिल से बाहर निकल आयी । शेर की हालत को देखकर उसे दया आई और उसने जाल को काट कर शेर को बचा लिया और शेर ने फिर चुहिया को शुक्रिया किया और फिर दोनों अच्छे दोस्त बन गये।

शरारती चूहा

एक बार की बात है।  सोनू नाम का एक लड़का था। वह अपने माता-पिता के साथ एक छोटे से गांव में रहता था। एक दिन सोनू के घर में एक शरारती चूहा आ गया। वह चूहा बहुत छोटा था लेकिन पूरे घर में उछल कूद करते रहता था। एक दिन उसने सोनू की सारी किताबें भी कुतर दिये। सोनू की मां जो भी खाना बनाती थी वह शरारती चूहा उसको भी चट कर देता था।एक दिन सोनू की मां ने शरबत बनाकर एक बोतल में रखी था तभी उस चूहे की नजर उस शरबत की बोतल पर पड़ी।

चूहा कई तरकीब लगाकर थक गया लेकिन चूहे को शरबत पीना था वह उस बोतल के ऊपर चढ़ गया और वह जैसे तैसे बोतल का ढक्कन खोलने में सफल हुआ। चूहा उस बोतल में अपना मुंह घुसाने की कोशिश करता रहा। लेकिन बोतल का मुंह छोटा था। चूहे का मुंह बोतल में नहीं घुस रहा था तभी चूहे ने एक योजना बनाई। उसने बोतल के अन्दर अपनी पूंछ डाली जिससे पूंछ शरबत से गीली हो गयी फिर उसने पूछ को चाट कर अपना पेट भर लिया और फिर चूहा सोनू के तकिए के नीचे बने अपने बिस्तर पर जाकर सो गया।

गाना गाने वाली बुलबुल

बहुत साल पुरानी एक बात है। चीन देश में एक राजा रहा करता था। उसका महल बहुत ही आलीशान था । उसके महल के पास में ही एक जंगल था। उस जंगल में एक बहुत ही सुन्दर बुलबुल रहती थी और वह बहुत ही मीठी-मीठी आवाज में गाना गाती थी। एक दिन राजा ने अपने मंत्री को बुलाया और आदेश दिया उस बुलबुल को महल में ले आओ । मंत्री किसी भी तरह से तो उस बुलबुल को पकड़ने में सफल हो गया और एक पिंजरे में बंद करके राजा के सामने ले आया।

पिंजरे में कैद हो जाने के कारण बुलबुल बहुत उदास और गुमसुम रहती थी । उसने खाना पीना और गाना सब कुछ बंद कर दिया था। कई दिन बीत गये पर बुलबुल कुछ नहीं बोली । रानी को बुलबुल पर बहुत दया आई। रानी ने पिंजरा खोल दिया। बुलबुल पिंजरे में से आजाद हो गई। वह दूर आसमान में उड़ गई। वह अब अपने आपको आजाद महसूस कर रही थी। वह खुश थी और पहले की तरह गाना गाने लगी थी। 

moral stories-गाना गाने वाली बुलबुल

राजा बहुत उदास हो गया था क्योंकि वह बुलबुल के संगीत का दिवाना हो गया था। फिर एक दिन उसने अपने मंत्री को बुलाया और उससे दूसरी चिड़िया लाने का आदेश दिया। मंत्री ने उस राज्य के सबसे अच्छे शिल्पकार से एक हूबहू वैसी ही मिट्टी की बुलबुल बनवाई जो कि गाना भी गाती थी।

राजा हर रोज सोने से पहले उसका गाना सुनता था। एक दिन वह अचानक गिर गई और टूट गई। राजा फिर से उदास और बिमार  रहने लगा। एक दिन वह बुलबुल रानी को धन्यवाद देने के लिए महल पहुंच गई। वह राजा के कमरे की खिड़की पर बैठ कर गाने लगी। बुलबुल के गाना सुनते ही राजा धीरे धीरे करके ठीक होने लगे। तब से हर रोज रात को वह बुलबुल राजा की खिड़की पर आती थी और गाना गाती थी और फिर राजा के सोने के बाद चली जाती थी।

दर्जी और हाथी की मित्रता

एक बार की बात है। एक छोटा सा गांव था। उस गांव में एक दर्जी रहता था। गांव के पास में एक जंगल था। जंगल में एक हाथी रहता था। गांव के बाहर एक बड़ा सा तालाब था उस तालाब में हाथी हर रोज नहाने जाता था। जब भी वह नहाने जाता तब लौटते समय वह हाथी दर्जी की दुकान पर जाता था। दर्जी उसे केला खिलाता था और फिर वह हाथी जंगल की ओर चले जाता ।

हर दिन हाथी दर्जी की दुकान पर जाता और दर्जी हर रोज कुछ ना कुछ उसे खाने को देता था। धीरे-धीरे दर्जी और हाथी बहुत अच्छे मित्र बन गये। एक दिन की बात है दर्जी किसी काम से गांव से बाहर गया था और दुकान पर उसका बेटा बैठा हुआ था। हाथी रोज की तरह उस दर्जी की दुकान पर गया और खाना मांगने के लिए अपनी सूंड़ आगे किया लेकिन दर्जी का बेटा बहुत ही शैतान था । उसने उसको खाना दिया और बल्की हाथी की सुढ़ पर सूई चुबो दी।  

हाथी को बहुत दर्द हुआ और वह गुस्से से तालाब की और दौड़ गया। हाथी गुस्से में तालाब से अपनी सूंड़ में किचड़ का पानी भर के ले आया और उसने दर्जी के सारे कपड़ों पर किचड़ डाल दिया । यह सब होता देख दर्जी का बेटा बहुत डर गया। जब दर्जी वापस आया तो उसके बेटे ने उसको सारी सच्चाई बतायी। दर्जी अपने बेटे से कहता है तुमने ऐसा नहीं करना चाहिए था। वह हमारा मित्र है। हमें किसी नहीं जानवर क्र साथ बुरा बर्ताव नहीं करना चाहिए ।

दर्जी के बेटे को अपनी गलती का अहसास हो जाता है। अब रोज हाथी फिर से दर्जी की दुकान पर जाता है और दर्जी उसे केला खिलाता है और उसका बेटा भी हाथी से माफी मांगता है और फिर वह दोनों अच्छे मित्र बन जाते हैं।

हिरण और शिकारी

एक बार की बात है। एक जंगल था वहाँ एक प्यारा सा हिरण रहा करता था। एक दिन वह तालाब में पानी पीने गया। पानी पीते समय उसने पानी में अपनी परछाई देखी। अपनी परछाई देखकर हिरण बहुत प्रसन्न होते हुए सोचने लगा कि भगवान ने उसे कितने खूबसूरत सींग दिए हैं।  वह और ज्यादा सोचने लगा कि काश मेरे पैर भी इतने ही खुबसूरत होते तो कितना अच्छा होता ये इतने पतले है कि मैं इन्हें देखकर बहुत दुखी हो जाता हूं।

तभी वहाँ अचानक एक शिकारी आया उसने निशाना लगाकर हिरण पर तीर छोड़ दिया तभी हिरण ने अपने फुर्तीले पैरों से छलांग लगाई और वह भागते हुए बहुत दूर निकल गया। कुछ देर बाद एक पेड़ पर उसके सींग उलझ गये। हिरण ने बहुत कोशिश कि लेकिन भागने में कामयाब नही हुआ और शिकारी ने उसे पकड़ लिया।

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आशा करते हैं की आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी। आप हमें अपने सुझाव और शिकायत के लिये नीचे कमैंट्स बॉक्स मैं जानकारी दें सकते हैं।

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नमस्कार 🙏दोस्तों, मेरा नाम पूजा है। मैंने MA हिंदी साहित्य से किया है। मुझे हिंदी में लेख लिखने का बहुत शौक है। हिंदी साहित्य से मास्टर करने के बाद मैंने ब्लॉग लिखने की शुरआत की। दोस्तों आपको मेरे ब्लॉग पोस्ट कैसे लगते है इस बारे में आप मुझे बता सकते है। मुझे सम्पर्क करने के लिए आप कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते है। धन्यवाद !

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