VPN क्या है? यह कैसे काम करता है और इसके लाभ क्या है?

VPN क्या है? VPN का पूरा नाम Virtual Private Network है। यह  एक बहुत ही सुरक्षित नेटवर्क कनेक्शन है, जिसके माध्यम से आप इंटरनेट से जुड़ते है। 


दोस्तों आमतौर पर आपने देखा होगा की जब भी हम किसी पब्लिक जगहों पर जाते है तो वहाँ पर Wi-Fi नेटवर्क उपलब्ध रहता है। जैसे हम किसी होटल या रेलवे प्लेटफॉर्म या फिर एयरपोर्ट पर जाते है तो हम बिना संकोच किये वहाँ के Wi-Fi नेटवर्क से जुड़ जाते है और इंटरनेट का उपयोग करने लगते है।

क्या आपने कभी सोचा है की आप जो भी चीज़ो को इंटरनेट पर चला रहे है वो कोई और भी देख सकता है। आप कोई पर्सनल चीज़ो या महत्वपूर्ण डाक्यूमेंट्स को देख रहे है और कोई आपकी ये पूरी जानकारी को देख सकता है या फिर क्या आप ये जान सकते है की जो नेटवर्क का आप इस्तेमाल कर रहे है वो नेटवर्क सुरक्षित है ? या इसे कोई ऐसा व्यक्ति चला रहा है जो की आपके डेटा को पब्लिक भी कर सकता है। 


यदि आप VPN का इस्तेमाल कर Wi-Fi नेटवर्क से जुड़ते है तो आप निश्चित हो सकते है की आप जो देख रहे है उसे कोई और नहीं देख सकता है यहाँ तक की उस नेटवर्क का ऑपरेटर भी। क्यकि VPN आपके डिवाइस के IP Address को छिपा देता है। 
इंटरनेट की दुनिया मे ऐसी बहुत सारी वेबसाइट होती है जो की सुरक्षा या फिर किसी पालिसी के कारण ब्लॉक की गयी होती है। अगर आप इनको ओपन करना चाहते है तो, हो सकता है कि यह वेबसाइट ओपन ना हो। VPN के माध्यम से आप इन वेबसाइट को एक्सेस कर सकते है। आइये जानते है VPN क्या है और यह कैसे काम करता है क्या VPN का इस्तेमाल करना ग़ैरकानूनी है ?

VPN क्या है?

VPN क्या है ?

VPN एक ऐसा Virtual Private Network है जो की आपके नेटवर्क को सुरक्षित बनाता है जिससे आपका महत्वपूर्ण डेटा सुरक्षित रहता है। यह एक ऐसा सुरक्षित नेटवर्क टनल ( सुरंग ) बनाता है जिसके माध्यम से डेटा को प्रसारित किया जाता है और डेटा को चोरी होने से रोका जाता है। यह नेटवर्क सुरक्षा के मामलों मे बहुत अच्छा नेटवर्क है।

जब आप VPN एप्लीकेशन को स्टार्ट करते है तब VPN आपके और अपने रिमोट सर्वर के बीच एक बहुत ही सुरक्षित इन्क्रिप्टेड सुरंग ( encrypted tunnel ) बनाता है। इंटरनेट डेटा इस सुरंग के रास्ते से जाता है जिससे डेटा सुरक्षित रहता है। 

ये भी जानिये: 

नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है ?

स्टार टोपोलॉजी क्या है ?

रिंग टोपोलॉजी क्या है ?

VPN के प्रकार 

इसके कुछ प्रकार है जो निम्नलिखित है। 

  1. Remote Access VPN
  2. Site to Site VPN

Remote Access VPN 

रिमोट एक्सेस वीपीएन उपयोगकर्ता को किसी भी निजी नेटवर्क से जोड़कर उसे उस नेटवर्क की फाइल या डाक्यूमेंट्स को एक्सेस करने की अनुमति देता है। कोई ऑफिस का कर्मचारी किसी दूसरे जगह से या घर से भी वीपीएन का इस्तेमाल करते हुए ऑफिस नेटवर्क को एक्सेस कर सकता है और अपने फाइल और डाक्यूमेंट्स पर घर बैठ कर ही काम कर सकता है।

Site to Site VPN

साइट तो साइट वीपीएन का इस्तेमाल अलग अलग ऑफिस के कार्यालयों ( Branches ) को जोड़ने के लिए किया जाता है। इस वीपीएन को राऊटर तो राऊटर वीपीएन भी कहते है। अगर किसी कंपनी के दो या इससे अधिक कार्यालय है जो की अलग अलग शहरों मे है। कंपनी साइट तो साइट वीपीएन के माध्यम से इन्हे जोड़ती है जिससे कंपनी का महत्वपूर्ण डेटा सुरक्षित रहता है क्यकि वीपीएन से जुड़े हुए Branches ही आपस मे नेटवर्क को एक्सेस कर सकते है।

Intranet-Based VPN

अगर एक ही कंपनी के अलग अलग ब्रांचेज ( Branches ) आपस मे वीपीएन से जुड़े है तो इन्हे इंट्रानेट आधारित वीपीएन कहते है। 

Extranet based VPN

अगर कोई कंपनी किसी अन्य कंपनी से साइट तो साइट वीपीएन का इस्तेमाल कर जुड़ती है तब इसे एक्सट्रानेट आधारित वीपीएन कहते है। 

वीपीएन प्रोटोकॉल के प्रकार 

वीपीएन प्रोटोकॉल के निम्नलिखित प्रकार है। 

  1. Internet Protocol Security (IPSec)
  2. Layer 2 Tunneling Protocol (L2TP)
  3. SSL and TLS
  4. OpenVPN
  5. Secure Shell (SSH)

VPN कैसे काम करता है ?

मार्किट में बहुत सारे वीपीएन उपलब्ध हैं आप अपने उपयोग के अनुसार कोई भी वीपीएन की सर्विस लेकर इसे डाउनलोड और इनस्टॉल कर सकते हैं। वीपीएन साफ्टवेयर के पास बहुत सारे वर्चुअल सर्वर होते हैं आप अपने अनुसार सर्वर का चयन कर इसे कनेक्ट कर सकते हैं। इसके बाद वीपीएन इस कनेक्शन को स्थापित करता हैं।

  • VPN सॉफ्टवेयर आपके कंप्यूटर के डेटा ट्रैफिक को इन्क्रिप्ट ( Encrypts ) करता हैं और इसे बहुत ही सुरक्षित तरीके से वीपीएन सर्वर को भेजता है। 
  • डेटा बीच में सर्विस प्रोवाइडर के पास से भी गुजरता है पर डेटा Encrypt होने  के कारण कोई भी आपके डेटा को पढ़ नहीं सकता है। सर्विस प्रोवाइडर का मतलब है कि आपने किस से इंटरनेट खरीदा है। जैसे एयरटेल, जिओ, या कोई ब्रॉडबैंड कनेक्शन। 
  • जब आपके कम्प्यूटर का इन्क्रिप्ट हुआ डेटा वीपीएन सर्वर के पास पहुँचता है तब सर्वर उसे डिक्रिप्ट करता है। 
  • अब वीपीएन सर्वर आपके डेटा को इंटरनेट पर भेजता है और एक रिप्लाई मैसेज को प्राप्त करता है जो की आपके कंप्यूटर लिए होता हैं।
  • डेटा ट्रेफिक को फिर से इन्क्रिप्ट किया जाता हैं और आपको वापस भेज दिया जाता हैं।  
  • आपके कंप्यूटर पर वीपीएन सॉफ्टवेयर इस डेटा को डिक्रिप्ट करता हैं जिसे आप आसानी से पढ़ सकते हैं।

 VPN से क्या-क्या लाभ है? (Advantages of VPN )

वीपीएन को इस्तेमाल करने के बहुत सारे कारण हो सकते हैं जैसे की खुद की पहचान को छिपाना या कोई ब्लॉक हुई साइट का इस्तेमाल करना आदि। VPN इस्तेमाल करने पर आप निम्नलिखित लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

1- पहचान छिपाना

अगर आप  वीपीएन का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो कोई भी आसानी से आपकी पहचान आपका स्थान यहाँ तक की आपके कंप्यूटर का IP Address तक का पता लगा सकता है। VPN के इस्तेमाल से आप इन सब चीजों को छिपा सकते हैं। जब आप इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं तब वीपीएन की तरफ से आपके डेटा को एक बाहरी सर्वर को भेजा जाता है। जिससे आपके कंप्यूटर का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है जिससे आपकी पहचान छिपी रहती हैं।

 2- सार्वजनिक नेटवर्क पर सुरक्षा

सार्वजनिक नेटवर्क पर जैसे वाई-फाई नेटवर्क का इस्तेमाल करना बहुत नुकसान पंहुचा सकता है उसी नेटवर्क पर कोई आपके डेटा की चोरी कर सकता है। VPN के इस्तेमाल से इसे रोका जा सकता हैं।

3- ऑफ़िस नेटवर्क का एक्सेस

VPN के माध्यम से आप अपने ऑफ़िस के लोकल एरिया नेटवर्क को एक्सेस कर सकते हैं जिससे आप घर पर से ही काम कर सकते हैं।

4- इंटरनेट की स्वतंत्रता

आजकल बहुत से देशों और सरकारों ने बहुत सारी वेबसाइटों को ब्लॉक कर दिया हैं जिससे आप स्वतंत्र होकर इंटरनेट का ठीक से इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं लेकिन वीपीएन की मदद से आप इन ब्लॉक वेबसाइट को खोल सकते हैं और इनका इस्तेमाल कर सकते हैं।

 5- हैकर्स से सुरक्षा

डेटा चोरी करने वालो को या किसी वेबसाइट को एक्सेस कर उसे नुकसान पहुंचना हो इनको इंटरनेट की दुनिया में हैकेर्स कहते है। वीपीएन का इस्तेमाल कर आप इनसे अपने डेटा को बचा सकते हैं।

VPN से हानियाँ ( Disadvantages of VPN )

वीपीएन की कुछ कमियाँ है जो निम्नलिखित है। 

1- धीमी स्पीड 

वीपीएन इंटरनेट की स्पीड को कम कर देता हैं क्युकी यह आपके कनेक्शन को कहीं दूर देश के Remote VPN Server से कनेक्ट करता है जिससे समय अधिक लगता है। मार्किट में जितने भी वीपीएन सर्वर है सभी में कुछ ना कुछ हद तक इंटरनेट की स्पीड कम ही रहती हैं।

2- वीपीएन सभी देशों में कानूनी नहीं है

बहुत सारे देशों में वीपीएन का उपयोग ग़ैरकानूनी हैं। बहुत सारी बड़ी-बड़ी कम्पनियां अपने सर्वर को सुरक्षित रखने के लिए वीपीएन का उपयोग करती हैं परन्तु, अगर आप इनके वेबसाइट को एक्सेस करना चाहते तो आपको वीपीएन का इस्तेमाल करना होगा लेकिन, वीपीएन ग़ैरकानूनी होने के कारण आप इन वेबसाइट इस्तेमाल का नहीं कर सकते हैं।

वीपीएन लागत

अगर आप एक अच्छा और सुरक्षित नेटवर्क की सोचते हैं तो आपको वीपीएन के बारे में भी सोचना पड़ता हैं। बहुत सारे टॉप कंपनी के वीपीएन बहुत अच्छी सुरक्षा प्रदान करते हैं लेकिन इनकी लागत बहुत ज्यादा होती हैं। फ्री साफ्टवेयर का इस्तेमाल से सुरक्षा का भी खतरा होता हैं।

इंटरनेट डेटा की खपत 

VPN के इस्तेमाल से इंटरनेट बैंडविड्थ की खपत बहुत जल्दी होती हैं जिससे इंटरनेट कनेक्शन की लागत भी ज्यादा लगती हैं। क्यकि वीपीएन डेटा ट्रेफिक को इन्क्रिप्ट और फिर डिक्रिप्ट करता हैं जिससे इंटरनेट डेटा का ज्यादा इस्तेमाल होता हैं।

VPN से संबंधित Q&A 

आशा करते है की आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी।आप हमें अपने सुझाव और शिकायत के लिये नीचे कमैंट्स बॉक्स मैं जानकारी दें सकते है।

Website | + posts

Hello Friends, My name is Pankaj I have almost 6 years of experience in the IT industry and 3+ years of experience in the software service industry. I thought to create a blog to provide information about the latest technology to everyone from my experience. I have made the MygoodLuck site for people to learn about technology in Hindi.

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x